महराजगंज: जनपद के बृजमनगंज में स्थित माँ आद्रवन लेहड़ा देवी शक्तिपीठ श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र है। नवरात्र के पावन दिनों में यहां लाखों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि पौराणिक कथाओं और भारत-नेपाल की सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है।
महाभारत काल से जुड़ी मान्यता
मान्यता है कि महाभारत काल में पांडवों ने अपना अज्ञातवास यहीं बिताया था। प्राचीन समय में यह क्षेत्र घने आद्रवन जंगल से घिरा था। पवह नामक जलाशय के किनारे माँ वनदेवी दुर्गा का मंदिर स्थापित किया गया, जो बाद में अदरौना या लेहड़ा देवी मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
स्थानीय लोककथा और अंग्रेजी शासन की घटना
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, माँ लेहड़ा देवी रोज नदी पार कर पौहारी बाबा के दर्शन के लिए जाया करती थीं। एक दिन नाविक की कुप्रवृत्ति देखकर माँ ने विकराल रूप धारण कर लिया और नाविक नाव समेत नदी में समा गया।
अंग्रेजी शासन के दौरान लेहड़ा छावनी में तैनात अफसर लगड़ा साहब ने माता की पिंडी पर गोली चलाई थी। कहा जाता है कि पिंडी से रक्त बहने लगा और उसी समय अफसर की घोड़े समेत मृत्यु हो गई। उसकी कब्र आज भी मंदिर के पश्चिम हिस्से में मौजूद है।
नवरात्र में भव्य आयोजन
नवरात्र के दिनों में मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना, अखंड कीर्तन, कन्या पूजन और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है। नेपाल से आने वाले श्रद्धालु अपनी पारंपरिक वेशभूषा में माता के दर्शन करते हैं।


