नई दिल्ली: भारतीय मीडिया जगत में एक अहम फैसले में दिल्ली हाईकोर्ट ने समाचार एजेंसी एशियन न्यूज़ इंटरनेशनल (ANI) को बड़ा झटका देते हुए उसकी अपील को खारिज कर दिया है। अदालत ने डाइनामाइट न्यूज़ के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि एएनआई की अपील में कोई ठोस आधार नहीं है। इस आदेश से डाइनामाइट न्यूज़ को बड़ी राहत मिली है और यूट्यूब पर पत्रकारिता करने वाले सैकड़ों पत्रकारों के लिए यह फैसला मील का पत्थर साबित हुआ है।
मामला कॉपीराइट विवाद से जुड़ा था। एएनआई ने डाइनामाइट न्यूज़ पर आरोप लगाया था कि उसने अपने कुछ वीडियो में एएनआई के अंशों का उपयोग किया है। डाइनामाइट न्यूज़ ने अदालत को बताया कि वह पिछले दस वर्षों से यूट्यूब चैनल चला रहा है और अब तक 17 हजार से अधिक वीडियो अपलोड कर चुका है। इनमें से सिर्फ नौ वीडियो में अनजाने में एएनआई की कुछ सेकंड की क्लिप्स शामिल हो गई थीं। अदालत को आश्वस्त करते हुए चैनल ने कहा कि ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी।
न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि एएनआई का रवैया अनुचित था और उसने अदालत की जानकारी दिए बिना यूट्यूब से संपर्क कर चैनल ब्लॉक कराने की कोशिश की, जो सरासर गलत है। कोर्ट ने कहा कि एकल न्यायाधीश के आदेश में कोई त्रुटि नहीं थी और इसलिए एएनआई की अपील प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज की जाती है।
इस फैसले के बाद डाइनामाइट न्यूज़ का यूट्यूब चैनल बहाल रहेगा। अदालत की सख्त टिप्पणी के बाद अब एएनआई किसी चैनल को कॉपीराइट के नाम पर ब्लैकमेल नहीं कर सकेगा। वरिष्ठ पत्रकार और डाइनामाइट न्यूज़ के एडिटर-इन-चीफ मनोज टिबड़ेवाल आकाश ने कहा कि यह फैसला स्वतंत्र पत्रकारिता की जीत है।


