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  • July 15, 2026
  • Last Update July 14, 2026 10:20 PM
  • Lucknow

महराजगंज से उठी आवाज़, UGC के समानता विनियमों के समर्थन में आसपा जिलाध्यक्ष ने आयोग चेयरमैन को भेजा पत्र

महराजगंज से उठी आवाज़, UGC के समानता विनियमों के समर्थन में आसपा जिलाध्यक्ष ने आयोग चेयरमैन को भेजा पत्र

महराजगंज: उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता, समावेशन और सामाजिक न्याय को सशक्त बनाने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा अधिसूचित “उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाले विनियम, 2026” को महराजगंज जनपद से भी व्यापक समर्थन मिलने लगा है। आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के जिलाध्यक्ष एडवोकेट अखिलेश आज़ाद ने यूजीसी चेयरमैन को पत्र भेजकर इन विनियमों का खुलकर समर्थन करते हुए इसे शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लाने वाला ऐतिहासिक कदम बताया है।

एडवोकेट अखिलेश आज़ाद ने अपने पत्र में कहा कि महराजगंज जैसे सीमावर्ती और ग्रामीण पृष्ठभूमि वाले जिले से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रदेश और देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में जाते हैं। ऐसे में समान अवसर और भेदभाव-मुक्त वातावरण उनके शैक्षणिक भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से कमजोर वर्गों के विद्यार्थियों को कैंपस में भेदभाव, उपेक्षा और असमान व्यवहार का सामना करना पड़ता रहा है, जिससे उनका आत्मविश्वास और शैक्षणिक प्रदर्शन प्रभावित होता है।

उन्होंने विशेष रूप से प्रत्येक उच्च शिक्षा संस्थान में समान अवसर केंद्र (Equal Opportunity Centre – EOC) की अनिवार्य स्थापना को महराजगंज के छात्रों के लिए लाभकारी बताया। उनके अनुसार यह केंद्र अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, महिलाओं और दिव्यांग छात्रों को शैक्षणिक मार्गदर्शन, परामर्श, छात्रवृत्ति संबंधी जानकारी और करियर काउंसलिंग उपलब्ध कराएगा। इससे ग्रामीण अंचल से आने वाले विद्यार्थियों को सही दिशा और संस्थागत सहयोग मिल सकेगा।

अखिलेश आज़ाद ने समानता समिति (Equity Committee) के गठन को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इसमें विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व होने से शिकायतों का निष्पक्ष और समयबद्ध समाधान संभव होगा। साथ ही 24×7 समानता हेल्पलाइन, मोबाइल समानता दल और छात्रावासों में समानता दूतों की व्यवस्था से छात्रों को किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर तुरंत सहायता मिल सकेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि इन विनियमों में निगरानी और जवाबदेही की सख्त व्यवस्था शामिल है, जिससे उच्च शिक्षा संस्थान नियमों का पालन करने के लिए बाध्य होंगे। नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर वित्तीय सहायता रोकने या मान्यता समाप्त करने जैसी कार्रवाई का प्रावधान यह सुनिश्चित करता है कि समानता केवल कागज़ों तक सीमित न रहे।

जनपद के शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का भी मानना है कि ये विनियम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप हैं और शिक्षा को सामाजिक सशक्तिकरण का माध्यम बनाते हैं। उन्होंने यूजीसी से अपील की कि इन नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाएँ, ताकि महराजगंज जैसे जिलों के छात्र अपने अधिकारों के प्रति सजग हो सकें।

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