नई दिल्ली: देश में मोबाइल और इंटरनेट कनेक्टिविटी तेज़ी से बढ़ रही है, लेकिन इसके साथ ही साइबर धोखाधड़ी और मोबाइल पहचान से जुड़े फर्जीवाड़े के मामले भी चिंताजनक स्तर तक पहुंच गए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अगर आपके नाम की सिम कार्ड या आपके फोन का IMEI नंबर किसी अपराध में इस्तेमाल होता है-तो कार्रवाई आप पर भी हो सकती है, भले ही अपराध किसी और ने किया हो।
दूरसंचार विभाग (DoT) ने लोगों को आगाह करते हुए कहा है कि अपने मोबाइल नंबर और डिवाइस को किसी और के हाथों में देने की आदत अब भारी पड़ सकती है। सरकार ने साफ कर दिया है कि सिम कार्ड साझा करना, गलत दस्तावेज़ लगाकर मोबाइल कनेक्शन लेना या IMEI से छेड़छाड़ करना अब कानूनन अपराध माना जाएगा।
क्यों बढ़ी सरकार की चिंता
5G के विस्तार के बाद लाखों नए मोबाइल यूजर्स जुड़े हैं, और इसी गति से IMEI नंबरों की क्लोनिंग और फर्जी पहचान वाले मोबाइल उपयोग के मामले बढ़े हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, कई साइबर अपराध चोरी के फोन, बदलें गए IMEI और दूसरों के नाम की सिम से किए जा रहे हैं।
क्या है नया नियम
24 नवंबर को जारी दिशा-निर्देशों के तहत-
🔻फर्जी डॉक्यूमेंट से सिम लेना-देना अपराध
🔻किसी और के सिम का उपयोग भी दंडनीय
🔻IMEI नंबर में बदलाव या छेड़छाड़ गैरकानूनी
सज़ा कितनी कड़ी?
टेलीकम्युनिकेशंस एक्ट, 2023 के मुताबिक:
🔻 3 साल तक की जेल
🔻 50 लाख रुपये तक जुर्माना
🔻 या दोनों
सबसे बड़ी बात, यह गैर ज़मानती अपराध है।
कैसे बचें परेशानी से
दूरसंचार विभाग ने सलाह दी है कि लोग अपने मोबाइल व सिम की स्थिति जांचने के लिए ‘संचार साथी’ ऐप या पोर्टल का उपयोग करें। इससे पता लगाया जा सकता है कि आपके नाम पर कितने मोबाइल कनेक्शन चल रहे हैं और आपका फोन कहीं ब्लैकलिस्ट या चोरी घोषित तो नहीं।


