गाजियाबाद: लगातार बढ़ते प्रदूषण से जूझ रहे गाजियाबाद के नागरिकों को राहत दिलाने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सख्त कदम उठाया है। जिले में प्रदूषण फैलाने वाली 250 औद्योगिक इकाइयों को नोटिस जारी कर दिसंबर के अंत तक अपनी फैक्टरियों में ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (ओसीईएमएस) लगाने के निर्देश दिए गए हैं। तय समय-सीमा में व्यवस्था न करने वाली इकाइयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, यहां तक कि सीलिंग का प्रावधान भी किया गया है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार गाजियाबाद में कुल 385 प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं। इनमें 353 लघु, 21 मध्यम और 11 बड़ी औद्योगिक इकाइयां शामिल हैं। फिलहाल प्रदूषण नियंत्रण के लिए जिले की 50 बड़ी फैक्टरियों की चिमनियों पर ओसीईएमएस सिस्टम पहले से स्थापित है, जिससे उनके उत्सर्जन की ऑनलाइन निगरानी की जा रही है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के नए निर्देशों के तहत अब रेड कैटेगरी यानी खतरनाक श्रेणी में आने वाली फैक्टरियों में भी यह प्रणाली अनिवार्य की गई है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी), गाजियाबाद ने ऐसी 250 फैक्टरियों की पहचान की है, जिनमें सबसे अधिक संख्या डाइंग फैक्टरियों की है। ये औद्योगिक इकाइयां मुख्य रूप से आर्यनगर और रूपनगर औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित हैं।
क्षेत्रीय अधिकारी अंकित सिंह ने बताया कि सभी चिह्नित फैक्टरियों को नोटिस भेज दिए गए हैं। ओसीईएमएस सिस्टम फैक्टरी की चिमनी पर लगाया जाएगा, जो सीधे सीपीसीबी के सर्वर से जुड़ा रहेगा। इससे उत्सर्जन के स्तर की रियल-टाइम निगरानी संभव होगी और नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों पर तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी।


