कुशीनगर: उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशानुसार सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिला सड़क सुरक्षा समिति की एक अहम बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी महेन्द्र सिंह तंवर और पुलिस अधीक्षक केशव कुमार ने संयुक्त रूप से की। बैठक का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली मृत्यु दर में कमी लाने के लिए रणनीति तैयार करना था।
बैठक में प्रदेश स्तर पर सड़क दुर्घटनाओं और मृतकों की संख्या का विस्तृत विश्लेषण किया गया। समीक्षा में पाया गया कि अधिकांश दुर्घटनाओं का कारण मानवीय भूल, तेज गति और ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन रहा। ऐसे मामलों में जागरूकता अभियान को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए।

राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर दुर्घटनाओं का विश्लेषण करते हुए ब्लैक स्पॉट्स (दुर्घटना संभावित क्षेत्रों) की पहचान कर सुधार कार्यों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया। इसमें सड़क संकेतक, अंडरपास और फुट-ओवर ब्रिज की कमी को दूर करने की योजना भी शामिल है।
विशेष ध्यान उन दुर्घटनाओं पर दिया गया जिनमें तीन या अधिक लोगों की मृत्यु हुई। इनमें तेज गति, गलत दिशा में वाहन चलाना और नशे में वाहन चलाना मुख्य कारण पाए गए। पुलिस अधीक्षक ने इन क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने और नियमित चेकिंग अभियान चलाने के निर्देश दिए।
बैठक में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन जैसे बिना हेलमेट, सीट बेल्ट न पहनना, मोबाइल फोन का उपयोग और नशे में वाहन चलाने के मामलों की समीक्षा भी की गई। पुलिस अधीक्षक ने इन उल्लंघनों पर कड़े निर्देश जारी करते हुए विशेष अभियान चलाने, हेलमेट और सीट बेल्ट के उपयोग को अनिवार्य करने और आम जनता को जागरूक करने पर जोर दिया।
बैठक में तय की गई रणनीतियों के माध्यम से जिला प्रशासन और पुलिस विभाग संयुक्त रूप से सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने और दुर्घटना दर में कमी लाने के लिए तत्पर हैं। प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे ट्रैफिक नियमों का पालन करें और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक रहें।


