महराजगंज: जमीन की फर्जी रजिस्ट्री कर धोखाधड़ी करने के एक लंबे समय से लंबित मामले में पुलिस ने निर्णायक कार्रवाई करते हुए दो वांछित आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। यह मामला ग्राम पंचायत सतगुर में 5 डिस्मिल जमीन की कूट रचित रजिस्ट्री से जुड़ा है, जिसकी परतें जांच के साथ खुलती चली गईं।
पीड़िता सरिता रानी की नामजद तहरीर पर 22 अगस्त 2019 को मुकदमा दर्ज किया गया था। विवेचना के दौरान सामने आए साक्ष्यों के आधार पर कुछ अन्य लोगों की भूमिका भी उजागर हुई, जिन्हें मामले में बाद में शामिल किया गया।
जानिए पूरा मामला
पीड़िता के मुताबिक उसने वर्ष 2007 में ग्राम पंचायत सतगुर में 5 डिस्मिल जमीन विधिवत बैनामा कराकर खरीदी थी और उस पर कब्जा भी प्राप्त कर लिया था। आरोप है कि 23 मई 2009 को उसी जमीन के 2 डिस्मिल रितिका (निवासी सतगुर) और 3 डिस्मिल श्रीमती संतराजी देवी (निवासी हरखपुरा) ने एक अन्य महिला को पीड़िता की जगह खड़ा कर फोटो लगवाया। इसके बाद फर्जी हस्ताक्षर और अंगूठा निशान तैयार कर कूट रचित विक्रय पत्र बनवाकर जमीन अपने नाम दर्ज करा ली गई।
जांच में यह भी सामने आया कि इस फर्जीवाड़े की साजिश रितिका के ससुर रूदल द्वारा रची गई थी, जिसकी भूमिका दस्तावेजी साक्ष्यों से पुष्ट हुई।
पुलिस ने वांछित अभियुक्त विंध्याचल पाल (निवासी हरखपुरा, पनियरा थाना क्षेत्र) और हरिद्वार (निवासी मंसूरगंज) को शनिवार दोपहर बाद रतनपुरवां पुल के पास से गिरफ्तार किया।
इस संबंध में पनियरा थाना के थानाध्यक्ष राघवेन्द्र सिंह ने बताया कि मामला पुराना होने के कारण सभी दस्तावेजों, हस्ताक्षरों और अंगूठा निशानों को सक्षम फॉरेंसिक प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजा गया था, जहां उन्हें फर्जी पाया गया। पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।


