लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार प्रदेश की औद्योगिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने जा रही है। इस बदलाव के बाद जिलाधिकारियों (डीएम) से एक महत्वपूर्ण अधिकार छिन जाएगा।
अब औद्योगिक पार्कों में भूखंड पर मिलने वाली छूट का अधिकार डीएम के पास नहीं रहेगा। सरकार इस अधिकार को उपायुक्त उद्योग को देने की तैयारी कर रही है। इसके लिए जल्द ही दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
उद्यमियों की परेशानियों पर सरकार का फैसला
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में औद्योगिक पार्कों में भूखंड आवंटन से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा हुई। वर्तमान व्यवस्था में भूखंड पर छूट देने और स्टांप ड्यूटी में राहत देने के लिए डीएम या उनके द्वारा अधिकृत अधिकारी के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं। समयाभाव के कारण डीएम अक्सर इस प्रक्रिया में विलंब कर देते हैं, जिससे निवेशकों और उद्यमियों को परेशानी होती है।
अब उपायुक्त उद्योग को मिलेगा अधिकार
बैठक में सहमति बनी कि निवेश आधारित नीतियों की तरह ही उपायुक्त उद्योग को इस प्रक्रिया के लिए अधिकृत किया जाए। स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग ने भी इस पर सहमति जताई है। जल्द ही कैबिनेट से इस प्रस्ताव को मंजूरी ली जाएगी।
औद्योगिक पार्कों में नए नियम
स्टांप शुल्क की देयता के लिए पूरा औद्योगिक पार्क एक इकाई माना जाएगा।
डीएम द्वारा औद्योगिक पार्क के भूखंडों का मूल्यांकन कर न्यूनतम दर तय की जाएगी।
दर तय करने से पहले डीएम सभी हितधारकों से विचार-विमर्श करेंगे।
यह व्यवस्था निजी निवेशकर्ताओं द्वारा विकसित औद्योगिक पार्कों पर भी लागू होगी।
पार्क विकसित होने की तिथि से तीन साल तक निवेशकर्ता द्वारा बेचे गए भूखंडों पर यही नियम लागू रहेंगे।
क्यों लिया गया यह निर्णय?
सरकार का मानना है कि इस बदलाव से उद्यमियों की दिक्कतें कम होंगी, निवेश प्रक्रिया तेज होगी और औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।


