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  • July 15, 2026
  • Last Update July 14, 2026 10:20 PM
  • Lucknow

ट्रॉनिका सिटी में समस्याओं की लंबी फेहरिस्त, यूपीसीडा सीईओ के दौरे से पहले बदली तस्वीर, उद्यमियों ने उठाए लीपापोती के आरोप

ट्रॉनिका सिटी में समस्याओं की लंबी फेहरिस्त, यूपीसीडा सीईओ के दौरे से पहले बदली तस्वीर, उद्यमियों ने उठाए लीपापोती के आरोप

गाजियाबाद: ट्रॉनिका सिटी औद्योगिक क्षेत्र में शनिवार को यूपीसीडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) विजय किरन आनंद के दौरे के दौरान उद्योगपतियों ने क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। हालांकि, दौरे से पहले स्थानीय अधिकारियों द्वारा अचानक कराए गए सफाई और मरम्मत कार्यों को लेकर उद्यमियों के बीच सवाल भी खड़े हो गए हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक, सीईओ विजय किरन आनंद उद्योगों से जुड़ी समस्याओं का जायजा लेने ट्रॉनिका सिटी पहुंचे थे। उन्होंने उद्यमियों के साथ बैठक कर बिजली, पानी, सीवर, सड़क और अन्य आधारभूत सुविधाओं से संबंधित शिकायतों को सुना तथा समस्याओं के त्वरित समाधान का भरोसा दिलाया।

लेकिन सीईओ के आगमन से पहले क्षेत्र में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई। स्थानीय उद्यमियों का आरोप है कि वर्षों से बंद पड़ा एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) अचानक चालू कर दिया गया, क्षेत्र में विशेष सफाई अभियान चलाया गया तथा प्लांट परिसर में आनन-फानन सड़क निर्माण कार्य भी कराया गया। उद्यमियों का कहना है कि ऐसे सुधार सामान्य दिनों में नहीं दिखाई देते और केवल वरिष्ठ अधिकारियों के दौरे के समय ही व्यवस्था दुरुस्त करने की कोशिश होती है।

डेवलपमेंट एंड वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने बैठक में कई महत्वपूर्ण मांगें रखते हुए दिल्ली-उत्तर प्रदेश यमुना बांध मार्ग के चौड़ीकरण, जलभराव और निकासी की स्थायी व्यवस्था, सेक्टर सी-6 एवं सी-7 में खाली पड़े लगभग 32 हजार वर्गमीटर पार्क के विकास, स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता तथा क्षेत्र की कानून व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई।

वहीं, इंडस्ट्रियल एसोसिएशन ऑफ एमएसएमई के अध्यक्ष अरुण गुप्ता ने उद्योगपतियों की विभिन्न समस्याओं और औद्योगिक गतिविधियों में आ रही बाधाओं को सीईओ के समक्ष रखा।

बैठक के दौरान सीईओ विजय किरन आनंद ने सभी उद्योगपतियों और संगठन प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान कराया जाएगा। हालांकि, स्थानीय अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर उद्यमियों में असंतोष साफ नजर आया। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि दौरे से पहले दिखी सक्रियता स्थायी सुधार में बदलती है या फिर यह केवल बड़े अधिकारियों के दौरे तक सीमित रह जाएगी।

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