नई दिल्ली: दिवाली का महापर्व जिसे प्रकाश का पर्व भी कहा जाता है 20 अक्टूबर को पूरे देश में आस्था, उल्लास और दीपों की रौशनी के साथ मनाया जाएगा। मान्यता है कि इस पवित्र रात्रि में मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जिन घरों में स्वच्छता, प्रकाश और श्रद्धा होती है उनमें वास करती हैं।
शास्त्रों में दीपदान को पुण्यकारी और दोष निवारक उपाय बताया गया है। अगर नियमों और स्थानों के अनुसार दीपक जलाया जाए, तो जीवन में सौभाग्य और समृद्धि का संयोग बनता है।
दीपक जलाने का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में दीपक अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक माना जाता है। यह न केवल रोशनी का माध्यम है, बल्कि नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त कर सकारात्मकता को आमंत्रित करता है।
धन की देवी लक्ष्मी, विघ्नहर्ता गणेश और भगवान विष्णु की पूजा में दीपक का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि दीप जलाने से घर की ऊर्जा शुद्ध होती है और सौभाग्य की शक्तियां सक्रिय होती हैं।
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घर के इन स्थानों पर ज़रूर जलाएं दीपक
छत या बालकनी में– इससे दिशाओं की शुद्धि होती है और घर की आभा दूर तक फैलती है।
मुख्य द्वार पर– दरवाजे के दोनों ओर घी या तेल के दो दीपक जलाएं। इससे नकारात्मकता दूर रहती है और लक्ष्मी का आगमन होता है।
तिजोरी या धन स्थान पर– इसे कुबेर दीपक कहते हैं। यह आर्थिक वृद्धि और धन स्थिरता लाता है।
रसोईघर में– अन्नपूर्णा माता को प्रसन्न करने के लिए तुलसी या स्टोव के पास दीपक रखें।
तुलसी चौरा में– यह पारिवारिक सुख, शांति और संतान सुख का प्रतीक है।
पूजा स्थान पर – देशी घी का दीपक आत्मिक शांति और पारिवारिक सौहार्द बढ़ाता है।
दीपक जलाने के नियम
दीपक शुद्ध देसी घी या तिल के तेल से जलाएं।
बाती कपास की रखें और दीपक को दक्षिण या पूर्व दिशा में रखें।
दीपक जलाते समय “ॐ दीपज्योतये नमः” मंत्र का जाप करें।
दीपक को फूंक मारकर न बुझाएं।
दिवाली की रात जाग्रत होती है किस्मत
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार दिवाली की रात में विशिष्ट स्थानों पर दीप जलाने से ग्रहदोष कम होते हैं। यह उपाय जीवन में रुके कार्यों, आर्थिक संकट और पारिवारिक कलह को दूर कर सकता है।
दिवाली की रात केवल सजावट का अवसर नहीं है, बल्कि आत्मिक शुद्धि और आध्यात्मिक उत्थान का प्रतीक है। श्रद्धा और नियमों के साथ दीपक जलाएं – घर में उजाला ही नहीं, सौभाग्य और समृद्धि भी प्रवेश करेंगे।


