बुलंदशहर: दानपुर क्षेत्र में आयुष्मान भारत योजना से जुड़ा एक ऐसा फर्जीवाड़ा सामने आया है जिसने पूरे स्वास्थ्य विभाग को हिलाकर रख दिया। दौका गांव में तैनात आशा बहु हितेश कुमारी पिछले कई दिनों से अपना आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए स्वास्थ्य केंद्र के चक्कर लगा रही थीं। हर बार उन्हें यही जवाब मिलता “सिस्टम में आपका कार्ड पहले से सक्रिय है।”

शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद कोई तकनीकी गलती होगी, लेकिन जब बार-बार वही समस्या सामने आई, तो उन्होंने कारण जानने का प्रयास किया। जांच में पता चला कि उनके आधार नंबर का किसी अज्ञात व्यक्ति ने दुरुपयोग कर गांव के कई लोगों के फर्जी आयुष्मान कार्ड बना दिए हैं। इतना ही नहीं, इसी अनियमितता का शिकार बनीं सुशीला देवी भी योजना के लाभ से वंचित रहीं।
स्वास्थ्य केंद्र में जब यह जानकारी सामने आई कि एक आशा के नाम पर कई फर्जी कार्ड पहले से सक्रिय हैं, तो विभाग में खलबली मच गई। आशा बहुओं ने बताया कि उनके दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर किसी ने ऐसे लोगों को लाभ दिलाया जो पात्र ही नहीं थे।
इससे भी चिंताजनक बात यह है कि यह गड़बड़ी सिर्फ दौका गांव तक सीमित नहीं है। दानपुर क्षेत्र के कई अन्य गांवों की आशा कार्यकर्ताओं हितेश कुमारी, सुशीला देवी समेत ने उसी तरह की शिकायतें दर्ज कराई हैं। सभी का आरोप है कि उनके आधार नंबर पर किसी नेटवर्क द्वारा फर्जी कार्ड जारी किए गए। इससे यह आशंका प्रबल हो गई है कि क्षेत्र में संगठित जालसाजी का एक बड़ा रैकेट सक्रिय है।
पीड़ित आशाओं ने मांग की है कि सभी फर्जी कार्ड तत्काल रद्द किए जाएं, दोषियों पर कार्रवाई की जाए और उन्हें उनके वास्तविक कार्ड जल्द उपलब्ध कराए जाएँ।
स्वास्थ्य विभाग के अधीक्षक डॉ. नवल किशोर ने पुष्टि की कि मामले की जांच के लिए एक विशेष टीम गठित कर दी गई है और पूरे प्रकरण की गहराई से जांच की जा रही है।
यह मामला न सिर्फ योजना की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है, बल्कि उन आशाओं की मेहनत और अधिकारों पर भी चोट करता है जो रोज़ दूसरों के स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए घर-घर जाती हैं।


