गाजियाबाद: भारत में वायु प्रदूषण का संकट लगातार गहराता जा रहा है और अब यह आम जनजीवन के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। स्विस वायु गुणवत्ता प्रौद्योगिकी कंपनी IQAir की वर्ष 2025 की रिपोर्ट ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, पीएम 2.5 के स्तर के आधार पर भारत दुनिया का छठा सबसे प्रदूषित देश बन गया है।
रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि लोनी (जनपद गाजियाबाद) को वर्ष 2025 में दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर दर्ज किया गया। यहां पीएम 2.5 की औसत वार्षिक सांद्रता 112.5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर मापी गई, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के निर्धारित सुरक्षित मानक से लगभग 22 गुना अधिक है। यह आंकड़ा न केवल चिंताजनक है, बल्कि स्थानीय स्तर पर बढ़ते प्रदूषण की गंभीरता को भी उजागर करता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, देश में वायु प्रदूषण के प्रमुख कारणों में वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, फसल अवशेषों का जलाना और निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल शामिल हैं। ये सभी मिलकर हवा में महीन कण (PM2.5) की मात्रा को खतरनाक स्तर तक बढ़ा रहे हैं।
वहीं, विश्व की राजधानियों में नई दिल्ली लगातार सबसे प्रदूषित राजधानी बनी हुई है। यहां वर्ष 2025 में पीएम 2.5 की औसत सांद्रता 82.2 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज की गई, जो सुरक्षित सीमा से कई गुना अधिक है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो वायु प्रदूषण का असर लोगों के स्वास्थ्य पर और भी गंभीर रूप से पड़ेगा। सांस और हृदय संबंधी बीमारियों के बढ़ते मामलों के साथ-साथ पर्यावरण पर भी इसका दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए आवश्यक है कि सरकार और आम जनता मिलकर प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस और सख्त कदम उठाएं।


