महराजगंज: शुक्रवार को पनियरा ब्लॉक परिसर अचानक अफरा-तफरी के माहौल में तब्दील हो गया, जब कोर्ट के आदेश पर सरकारी भवनों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू हुई। जैसे ही प्रशासनिक टीम के साथ बुलडोजर परिसर में घुसे, वहां मौजूद कर्मचारी फाइलें और जरूरी दस्तावेज़ समेटने में जुट गए। पूरे ब्लॉक में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।
मामला खंड विकास अधिकारी बनाम नरेंद्र सिंह व अन्य शीर्षक से जुड़ा है। यह विवाद लगभग एक एकड़ भूमि (आराजी संख्या 788-ख, 66 डिसमिल और 789-क, 34 डिसमिल) से संबंधित है। यह भूमि विवाद वर्ष 1987 से दीवानी न्यायालय गोरखपुर में विचाराधीन था। लंबे मुकदमे के बाद अदालत ने 30 जनवरी 1991 को फैसला सुनाते हुए विवादित भूमि से अवैध कब्जा हटाकर वादी पक्ष को कब्जा दिलाने का आदेश दिया था।
इसके बाद आदेश के अनुपालन हेतु सिविल जज जूनियर डिवीजन न्यायालय में निष्पादन वाद दाखिल किया गया। अदालत ने 3 नवंबर 2025 को खंड विकास अधिकारी पनियरा को आदेश की प्रति भेजते हुए 7 नवंबर 2025 को कब्जा दिलाने की तिथि तय की। निर्धारित तिथि पर अदालत अमीन अरविंद कुमार मिश्रा और हरपत यादव समेत विभागीय कर्मियों की टीम मौके पर पहुंची और कब्जा दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी।
जैसे ही बुलडोजर सरकारी भवनों की दीवारों पर चला, वहां मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। कई कर्मचारी फाइलें उठाकर भागते दिखे।
इसी बीच मौके पर पहुंचे सदर एसडीएम और अदालत अमीन के बीच ध्वस्तीकरण को लेकर तीखी नोकझोंक भी हुई। बताया जा रहा है कि एसडीएम ने तत्काल कार्य रोकने के निर्देश दिए और मौके पर मौजूद जेसीबी मशीनों को थाने भेज दिया गया।
खबर भेजे जाने तक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई रुकी हुई थी, लेकिन पनियरा ब्लॉक परिसर में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, जबकि कर्मचारियों में बेचैनी और अनिश्चितता का माहौल कायम है।


