गाजियाबाद: दिल्ली की सीमा से सटा लोनी इन दिनों एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां विकास और व्यवस्था की कहानी दो अलग-अलग दिशाओं में चलती दिखाई देती है। एक तरफ नगर पालिका सैकड़ों करोड़ रुपये की विकास योजनाओं का खाका तैयार कर रही है, प्रशासन अवैध कब्जों पर बुलडोजर चला रहा है और पुलिस अपराधियों पर शिकंजा कसने का दावा कर रही है। वहीं दूसरी तरफ गोलियों की आवाज, हत्याएं, जाम नाले, बदहाल सड़कें और प्रदर्शन करती जनता यह सवाल उठा रही है कि आखिर बदलाव जमीन पर कब दिखाई देगा?
अपराध कम हुआ या सिर्फ कार्रवाई बढ़ी?
बीते कुछ दिनों में लोनी ने कई ऐसी घटनाएं देखीं, जिन्होंने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। पुलिस चौकी से कुछ ही दूरी पर दिनदहाड़े फायरिंग, विजय विहार में ऑटो चालक आफताब की हत्या और आशियाना सिटी में सैलून कर्मचारी तस्लीम की हत्या जैसी घटनाएं लोगों में असुरक्षा का एहसास बढ़ाती हैं।
हालांकि पुलिस कमिश्नरेट लगातार ‘ऑपरेशन क्लीन’ चला रहा है। हिस्ट्रीशीटरों का सत्यापन, अपराधियों की निगरानी और लगातार गिरफ्तारियां इस बात का संकेत हैं कि पुलिस सक्रिय है। लेकिन अपराधियों का खुलेआम वारदात को अंजाम देना यह भी दर्शाता है कि स्थानीय स्तर पर निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
बुलडोजर चला फिर भी नालियां जाम
प्रशासन ने सरकारी जमीन पर हुए अवैध कब्जों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कई स्थानों पर करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया। यह प्रशासनिक इच्छाशक्ति का संकेत माना जा रहा है।
लेकिन दूसरी तस्वीर उतनी ही चिंताजनक है। लोनी तिराहा स्थित हनुमान मंदिर के पास महीनों से नाला जाम है। सड़क पर भरा गंदा पानी लोगों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। बरसात के मौसम में हालात और बिगड़ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बड़ी योजनाओं से पहले रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान जरूरी है।
करोड़ों का बजट, लेकिन जनता पूछ रही- बदलाव कहां है?
लोनी नगर पालिका ने इस वर्ष लगभग ₹297 करोड़ का बजट पारित किया है। वार्डों के विकास, ड्रेनेज सिस्टम और आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए बड़ी घोषणाएं की गई हैं।
लेकिन बजट पारित होने से पहले बोर्ड बैठक में हुए हंगामे और एक सभासद द्वारा आत्मदाह के प्रयास ने यह संकेत दिया कि विकास योजनाओं को लेकर जनप्रतिनिधियों के बीच भी मतभेद मौजूद हैं। यही कारण है कि जनता अब घोषणाओं से ज्यादा उनके परिणाम देखना चाहती है।
जब जनता सड़क पर उतरती है
आफताब हत्याकांड के बाद परिजनों द्वारा दिल्ली-देहरादून हाईवे जाम करना केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि व्यवस्था के प्रति बढ़ते असंतोष का संकेत भी था। दूसरी ओर ई-पंजीकरण व्यवस्था को लेकर जारी आंदोलन ने आम नागरिकों के साथ-साथ सरकारी राजस्व को भी प्रभावित किया है। लगातार विरोध प्रदर्शन यह बताते हैं कि प्रशासन और जनता के बीच संवाद की दूरी बढ़ रही है।
लोनी को क्या चाहिए?
लोनी को केवल बड़े बजट या बड़ी घोषणाओं की नहीं, बल्कि प्रभावी क्रियान्वयन की जरूरत है। कानून-व्यवस्था में स्थानीय स्तर पर पुलिस की मौजूदगी और जवाबदेही मजबूत करनी होगी। नगर पालिका को जलनिकासी, सफाई और बुनियादी सुविधाओं पर प्राथमिकता से काम करना होगा। विकास तभी सार्थक होगा जब उसका लाभ आम नागरिक को महसूस हो।


