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  • July 15, 2026
  • Last Update July 14, 2026 10:20 PM
  • Lucknow

धान खरीद के नाम पर किसानों से लूट, पनियरा समिति पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप, जानिए कटौती का पूरा खेल

धान खरीद के नाम पर किसानों से लूट, पनियरा समिति पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप, जानिए कटौती का पूरा खेल

महराजगंज: सरकार जहां किसानों को उनकी उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाने और बिचौलियों से मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से साधन सहकारी समितियों के माध्यम से धान क्रय केंद्र संचालित कर रही है, वहीं जनपद महाराजगंज की पनियरा साधन सहकारी समिति में धान खरीद को लेकर गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। क्षेत्रीय किसानों ने समिति के सचिव और कर्मचारियों पर गल्ला व्यापारियों से सांठगांठ कर किसानों का शोषण करने का आरोप लगाया है।

समिति पर लामबंद हुए किसान

किसानों का कहना है कि समिति पर स्थानीय किसानों के धान को यह कहकर वापस कर दिया जा रहा है कि बोरा उपलब्ध नहीं है या गोदाम में जगह नहीं है, जबकि गल्ला व्यापारियों का धान बिना किसी रोक-टोक के तौला जा रहा है। कई किसानों ने बताया कि बार-बार चक्कर लगाने के बाद जब उनका धान तौला गया, तो नमी और गुणवत्ता के नाम पर प्रति कुंतल 5 से 7 किलो तक की अवैध कटौती की गई।

नगर पंचायत पनियरा निवासी ब्रह्मदेव सिंह ने बताया कि उन्होंने 50 कुंतल 60 किलो धान समिति पर दिया था, लेकिन भुगतान केवल 48 कुंतल 80 किलो का किया गया। इसी तरह नेवास पोखर निवासी बबलू यादव और पनियरा निवासी महेंद्र साहनी ने बताया कि उन्हें एक माह से “आज-कल” कहकर दौड़ाया जा रहा है, लेकिन अब तक उनका धान नहीं तौला गया।

रजौड़ा पंजुम निवासी मनोज सिंह, हेमछापर निवासी पारस सिंह, हरिलाल सिंह और गोनहा निवासी मानसिंह सहित कई किसानों ने भी तौल के दौरान 50 किलो से लेकर एक कुंतल तक की कटौती का आरोप लगाया है।

किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि समिति में अब तक लगभग 4500 कुंतल धान की तौल कागजों में दर्शाई गई है, जबकि गोदाम की वास्तविक भंडारण क्षमता मात्र 700 कुंतल के आसपास है। आरोप है कि शेष धान की फर्जी तौल दिखाकर गल्ला व्यापारियों को लाभ पहुंचाया गया। साथ ही रात के अंधेरे में उन किसानों से अंगूठा लगवाने का भी आरोप है, जो पहले ही अपना धान निजी व्यापारियों को बेच चुके हैं।

पीड़ित किसानों ने शासन-प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी सचिव, कर्मचारियों और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि सरकारी क्रय केंद्रों पर किसानों का शोषण रुक सके और उन्हें उनकी फसल का पूरा मूल्य मिल सके।

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