महराजगंज: भारत-नेपाल सीमा से सटे बरगदवा थाना क्षेत्र में अवैध मिट्टी खनन का कारोबार तेजी से पैर पसारता जा रहा है। खनन माफियाओं ने नियमों और कानून को धता बताते हुए फर्जी कागजी खेल के जरिए मिट्टी की अवैध खुदाई का नया तरीका अपनाया है। आरोप है कि एक स्थान के वैध पट्टों के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर दूसरे क्षेत्रों की निजी जमीनों पर जेसीबी और लोडर मशीनों से दिन-रात मिट्टी निकाली जा रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार इस पूरे मामले की जानकारी पुलिस और राजस्व विभाग को होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि कथित सांठगांठ और लाभ के चलते जिम्मेदार विभाग मूकदर्शक बने हुए हैं, जिससे खनन माफियाओं के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि खनन विभाग की जांच से बचने के लिए माफियाओं ने नया हथकंडा भी तैयार कर लिया है। जब भी जांच टीम मौके पर पहुंचती है, तो उन्हें यह कहकर गुमराह कर दिया जाता है कि मिट्टी निजी खेत से निकाली जा रही है और उसका उपयोग घर की भराई के लिए किया जा रहा है। इसी बहाने बड़े पैमाने पर अवैध खनन को अंजाम दिया जा रहा है।
क्षेत्र के कई गांवों में दिन से लेकर देर रात तक उपजाऊ कृषि भूमि को गहराई तक खोदा जा रहा है। मिट्टी से लदे ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉली मुख्य मार्गों पर तेज रफ्तार से दौड़ रहे हैं, जिससे ग्रामीण सड़कें टूटकर बदहाल होती जा रही हैं। वहीं उड़ती धूल और भारी वाहनों की आवाजाही से स्थानीय लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब भी कोई व्यक्ति इस अवैध कारोबार का विरोध करता है, तो उसे प्रशासनिक कार्रवाई का भय दिखाकर चुप करा दिया जाता है। लोगों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि अवैध खनन के चलते सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, जबकि पर्यावरण और खेती योग्य जमीन भी लगातार बर्बाद हो रही है।


