नई दिल्ली: अगर आप यात्रा के शौकीन हैं और अधिकतर भुगतान क्रेडिट या डेबिट कार्ड से करते हैं, तो सतर्क हो जाना बेहद जरूरी है। दुनियाभर में एक नया डिजिटल पेमेंट फ्रॉड सामने आया है, जिसे ‘घोस्ट टैपिंग’ स्कैम कहा जा रहा है। यह स्कैम खासतौर पर टूरिस्ट स्थलों, एयरपोर्ट्स और भीड़-भाड़ वाले आयोजनों में तेजी से फैल रहा है।
घोस्ट टैपिंग स्कैम में अपराधी टैप-टू-पे (NFC) तकनीक का गलत इस्तेमाल करते हैं। स्कैमर पोर्टेबल NFC रीडर या मॉडिफाइड स्मार्टफोन की मदद से बिना किसी OTP या कार्ड डिटेल के पीड़ित के कार्ड या मोबाइल से पेमेंट ट्रिगर कर देता है। अगर कार्ड या फोन में NFC ऑन है, तो कुछ सेकंड की नजदीकी ही ट्रांजैक्शन के लिए काफी होती है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह फ्रॉड अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, स्पेन, इटली, थाईलैंड और इंडोनेशिया जैसे हाई-टूरिज्म देशों में देखा जा रहा है। खासकर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, ट्रांजिट हब, फेस्टिवल और व्यस्त बाजार स्कैमर्स के आसान ठिकाने बनते जा रहे हैं। यात्रा के दौरान लोग जल्दी भुगतान करने के लिए टैप-टू-पे पर निर्भर रहते हैं, जिससे सतर्कता कम हो जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बचाव के लिए जब जरूरत न हो तो मोबाइल में NFC बंद रखें, RFID-ब्लॉकिंग वॉलेट का इस्तेमाल करें और अनजान दुकानों पर टैप-टू-पे से बचें। साथ ही बैंक ट्रांजैक्शन अलर्ट और मोबाइल वॉलेट में बायोमेट्रिक लॉक जरूर सक्रिय रखें।
हालांकि एक्सपर्ट्स मानते हैं कि टैप-टू-पे तकनीक अब भी पारंपरिक कार्ड स्वाइप से अधिक सुरक्षित है, लेकिन भीड़-भाड़ वाली जगहों पर थोड़ी-सी लापरवाही भारी नुकसान का कारण बन सकती है। सतर्कता ही इस नए डिजिटल खतरे से सबसे बड़ा बचाव है।


