कुशीनगर: किसानों को समय पर और निर्धारित मूल्य पर उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कृषि विभाग ने कालाबाजारी, अवैध भंडारण और अनियमित वितरण के खिलाफ सख्त अभियान छेड़ दिया है। अभियान के तहत हुई ताबड़तोड़ कार्रवाई में स्टॉक में भारी गड़बड़ी उजागर होने के बाद दो अलग-अलग मामलों में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
जिला कृषि अधिकारी संजीव कुमार सिंह के निर्देशन में 20 जुलाई को विभागीय टीम ने मथौली बाजार से रामकोला की ओर ले जाई जा रही 20 बोरी यूरिया को संदिग्ध परिस्थितियों में पकड़ा। जांच में पता चला कि उर्वरक साधन सहकारी समिति, मथौली बाजार से नियमों के विपरीत भेजा जा रहा था।
इसके बाद अधिकारियों ने समिति का औचक निरीक्षण किया। पीओएस मशीन में दर्ज स्टॉक का मिलान करने पर 428 बोरी यूरिया और 192 बोरी डीएपी मौके से गायब मिली। प्रारंभिक जांच में उर्वरकों के वितरण में गंभीर अनियमितता और हेराफेरी की आशंका सामने आने पर समिति के सचिव रामसागर सिंह के खिलाफ संबंधित थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया।
इसी अभियान के दूसरे चरण में 21 जुलाई को मिली शिकायत के आधार पर ग्राम मठिया विशम्भर (माधोपुर), पोस्ट सेखवनिया निवासी कृष्ण कुमार पुत्र स्वामीनाथ कुशवाहा के परिसर पर छापा मारा गया। निरीक्षण के दौरान वहां विभिन्न कंपनियों की 47 बोरी उर्वरक का भंडारण मिला। जांच में संबंधित व्यक्ति कोई वैध लाइसेंस अथवा प्राधिकार-पत्र प्रस्तुत नहीं कर सका।
कृषि विभाग ने इसे उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 का उल्लंघन मानते हुए संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज करा दी।
जिला कृषि अधिकारी संजीव कुमार सिंह ने स्पष्ट कहा कि किसानों के अधिकारों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने सभी उर्वरक विक्रेताओं और सहकारी समितियों को शासन के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए। उन्होंने चेतावनी दी कि कालाबाजारी, अवैध भंडारण, फर्जी वितरण अथवा उर्वरकों की हेराफेरी में लिप्त पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।


