गाजियाबाद: दिल्ली-एनसीआर का अहम प्रवेश द्वार माने जाने वाला लोनी इन दिनों प्रशासनिक बैठकों, राजनीतिक हलचलों और विकास के दावों का केंद्र बना हुआ है, लेकिन जमीनी हालात अब भी गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। एक तरफ प्रशासन अपराध नियंत्रण, अवैध कब्जों पर कार्रवाई और जनसमस्याओं के त्वरित समाधान का दावा कर रहा है, तो दूसरी ओर दूषित पेयजल, जाम सीवर, टूटी सड़कें, अधूरे निर्माण कार्य और बढ़ते प्रदूषण जैसी समस्याएं आम लोगों की जिंदगी को लगातार प्रभावित कर रही हैं।
लोनी तहसील में आयोजित ‘सम्पूर्ण समाधान दिवस’ के दौरान अधिकारियों ने जनता की शिकायतों के त्वरित निस्तारण का भरोसा दिया, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि पानी, सीवर और सड़कों से जुड़ी शिकायतें अब भी कागजों और फाइलों से बाहर नहीं निकल पा रही हैं। नगर पालिका और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर इसलिए भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि करोड़ों रुपये की लागत से चल रहे सीवर, नाला और सड़क निर्माण के कई प्रोजेक्ट अब तक अधूरे पड़े हैं।
मानसून की दस्तक से पहले इन योजनाओं के पूरे न होने से जलभराव, कीचड़ और ट्रैफिक जाम की आशंका और बढ़ गई है। दिल्ली-सहारनपुर मार्ग समेत लोनी की कई कॉलोनियों में विकास कार्यों की धीमी रफ्तार लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बरसात शुरू होते ही सड़कें तालाब में बदल जाती हैं, सीवर उफनने लगते हैं और आवागमन बाधित हो जाता है, लेकिन जिम्मेदार एजेंसियों की तरफ से कोई ठोस तैयारी दिखाई नहीं दे रही।
पीडब्ल्यूडी और निर्माण एजेंसियों की सुस्ती को लेकर भी नाराजगी बढ़ रही है, क्योंकि परियोजनाएं तय समयसीमा से काफी पीछे चल रही हैं। कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर भी तस्वीर पूरी तरह संतोषजनक नहीं दिखती। पुलिस की ओर से अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई, एनकाउंटर और मानव तस्करी गिरोहों के खुलासे जैसी उपलब्धियां सामने जरूर आई हैं, लेकिन हाल के दिनों में ठेकेदार से मारपीट, निवेश के नाम पर करोड़ों की ठगी, मनी लॉन्ड्रिंग और दिनदहाड़े फायरिंग जैसी घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
व्यापारी और आम नागरिक दोनों के बीच यह चिंता बढ़ी है कि सख्त कार्रवाई के दावों के बावजूद आपराधिक घटनाओं पर पूरी तरह लगाम क्यों नहीं लग पा रही। लोनी की सबसे गंभीर चुनौतियों में प्रदूषण भी शामिल है। ट्रॉनिका सिटी की फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं और रासायनिक अपशिष्ट, साथ ही शाहदरा ड्रेन का दूषित पानी, क्षेत्र के पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन चुका है।
इसके बावजूद प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े विभागों की निष्क्रियता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रदूषण जैसी गंभीर समस्या पर संबंधित एजेंसियां अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखा रही हैं। राजनीतिक स्तर पर भी लोनी अब एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। सत्ता पक्ष जहां विकास और सुशासन के दावे कर रहा है, वहीं विपक्ष क्षेत्र की बदहाल सड़कें, अधूरी परियोजनाएं, जलनिकासी की समस्या, प्रदूषण और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाने की तैयारी में है।
यदि समय रहते प्रशासन ने कागजी दावों से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर ठोस और जवाबदेह कार्रवाई नहीं की, तो आने वाले समय में यही जनआक्रोश बड़े विरोध का रूप ले सकता है। लोनी की मौजूदा तस्वीर साफ बताती है कि केवल बैठकों, दावों और घोषणाओं से हालात नहीं बदलने वाले। जनता को राहत तभी मिलेगी, जब पेयजल, सीवर, सड़क, जलनिकासी, सुरक्षा और प्रदूषण जैसे बुनियादी मुद्दों पर तेजी से काम होगा और जिम्मेदार विभागों की जवाबदेही तय की जाएगी।


