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  • July 31, 2026
  • Last Update July 30, 2026 6:47 AM
  • Lucknow

लोनी की सड़कों से कॉलोनियों तक नशे का साया, पुलिस की कार्रवाई के बावजूद क्यों नहीं थम रहा जहर?

लोनी की सड़कों से कॉलोनियों तक नशे का साया, पुलिस की कार्रवाई के बावजूद क्यों नहीं थम रहा जहर?

गाजियाबाद: दिल्ली से सटे गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र में नशे का काला कारोबार अब केवल पुलिस रिकॉर्ड तक सीमित मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह स्थानीय समाज, युवाओं के भविष्य और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनकर उभर रहा है। गांजा, स्मैक, नशीली गोलियों और अवैध शराब की बढ़ती उपलब्धता ने इलाके में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। पिछले कुछ समय में सामने आई घटनाएं और पुलिस की कार्रवाई इस बात की ओर इशारा करती हैं कि लोनी में नशे का नेटवर्क धीरे-धीरे गहरी जड़ें जमा रहा है।

ताजा मामला ट्रोनिका सिटी थाना क्षेत्र का है, जहां पुलिस ने 19 वर्षीय अरमान को करीब डेढ़ किलोग्राम अवैध गांजे के साथ गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार आरोपी दिल्ली से थोक में गांजा लाकर उसे छोटी-छोटी पुड़ियों में तैयार करता था और फिर स्थानीय स्तर पर बेचता था। प्रारंभिक पूछताछ में यह भी सामने आया कि उसका नेटवर्क केवल एक-दो लोगों तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा सप्लाई सिस्टम सक्रिय होने की आशंका है। यह गिरफ्तारी सिर्फ एक आरोपी की धरपकड़ नहीं, बल्कि इस बात का संकेत है कि लोनी में नशे का कारोबार अब युवाओं और स्थानीय आबादी के बीच अपनी पैठ बना चुका है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि लोनी की कई कॉलोनियों और सीमावर्ती इलाकों में नशे से जुड़ी गतिविधियां बढ़ी हैं। देर रात संदिग्ध लोगों की आवाजाही, युवाओं का गलत संगत में पड़ना, छोटी-छोटी चोरी, मोबाइल झपटमारी और आपसी झगड़ों की घटनाएं बढ़ने लगी हैं। नशे की लत पूरी करने के लिए कुछ किशोर और युवा अपराध की ओर बढ़ रहे हैं, जो आने वाले समय के लिए गंभीर चेतावनी है। यह स्थिति केवल कानून-व्यवस्था का संकट नहीं, बल्कि सामाजिक ढांचे के कमजोर पड़ने का भी संकेत है।

लोनी की भौगोलिक स्थिति इस समस्या को और गंभीर बना देती है। दिल्ली से सटे होने के कारण यहां कई ऐसे रास्ते हैं, जिनका इस्तेमाल तस्कर आसानी से करते हैं। सीमावर्ती इलाकों से नशे और अवैध शराब की खेप लाकर घनी आबादी वाली कॉलोनियों में खपाना अपेक्षाकृत आसान माना जाता है। मुख्य मार्गों पर पुलिस की मौजूदगी जरूर नजर आती है, लेकिन अंदरूनी कॉलोनियों, सुनसान गलियों और बॉर्डर से जुड़े कुछ हिस्सों में निगरानी की कमी तस्करों के लिए राहत बन जाती है। यही वजह है कि स्थानीय स्तर पर ‘पुड़िया कल्चर’ तेजी से फैलने की बात कही जा रही है।

हालांकि, गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट ने इस चुनौती को देखते हुए हाल के दिनों में सख्त रुख अपनाया है। पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर चल रहे ‘ऑपरेशन प्रहार’ के तहत लोनी, ट्रोनिका सिटी और अंकुर विहार क्षेत्रों में लगातार चेकिंग, दबिश और गिरफ्तारी की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का दावा है कि छोटे विक्रेताओं के साथ-साथ उनके पीछे काम कर रहे सप्लाई नेटवर्क को भी चिन्हित किया जा रहा है। एसीपी लोनी के नेतृत्व में टीमें मुखबिर तंत्र को मजबूत कर रही हैं और संवेदनशील इलाकों पर रात के समय विशेष निगरानी रखी जा रही है।

इसके बावजूद यह साफ है कि केवल पुलिस कार्रवाई से इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। नशे के खिलाफ लड़ाई में परिवार, समाज और स्थानीय संगठनों की भूमिका भी बेहद अहम है। अभिभावकों को बच्चों की संगत, दिनचर्या और बदलती आदतों पर नजर रखनी होगी। कॉलोनियों में संदिग्ध गतिविधि दिखने पर स्थानीय पुलिस और डायल 112 को तुरंत सूचना देना जरूरी है। साथ ही, स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता अभियान और युवाओं के लिए काउंसलिंग जैसी पहल भी समय की जरूरत बन चुकी है।

लोनी के सामने आज बड़ी चुनौती है अपनी युवा पीढ़ी को नशे के जाल से बचाने की। पुलिस का ‘ऑपरेशन प्रहार’ इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन जब तक समाज, परिवार और प्रशासन मिलकर इस लड़ाई को नहीं लड़ेंगे, तब तक यह जहर पूरी तरह खत्म नहीं होगा। अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो नशे की यह आग आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को भी झुलसा सकती है।

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