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  • July 31, 2026
  • Last Update July 30, 2026 6:47 AM
  • Lucknow

जनगणना का महाअभियान या प्रशासनिक अव्यवस्था? गाजियाबाद मॉडल पर उठे तीखे सवाल

जनगणना का महाअभियान या प्रशासनिक अव्यवस्था? गाजियाबाद मॉडल पर उठे तीखे सवाल

गाजियाबाद: देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रियाओं में शामिल जनगणना-2026 का पहला चरण ही गाजियाबाद में सवालों के घेरे में आ गया है। हाउस लिस्टिंग जैसे बुनियादी चरण में जिले की तैयारी इस कदर कमजोर साबित हुई कि लोनी समेत कई इलाकों के आधे से अधिक ब्लॉक्स में समय पर काम शुरू ही नहीं हो सका। इससे न केवल प्रशासनिक दावों की पोल खुली है, बल्कि जुटाए गए आंकड़ों की सटीकता और विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

सूत्रों के मुताबिक, जनगणना ड्यूटी में लगाए गए 800 से अधिक कर्मचारियों ने ड्यूटी से मुक्त किए जाने की मांग कर दी थी। इसके अलावा बड़ी संख्या में प्रगणक और सुपरवाइजर अनिवार्य प्रशिक्षण सत्रों से अनुपस्थित रहे। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मैदानी अमला ही तैयार नहीं था, तो प्रशासन किस आधार पर इतनी बड़ी राष्ट्रीय प्रक्रिया को समय पर पूरा करने का दावा कर रहा था?

मामला केवल कर्मचारियों की कमी या देरी तक सीमित नहीं है। डिजिटल जनगणना के नाम पर जिस आधुनिक व्यवस्था का प्रचार किया गया, वह भी जमीनी स्तर पर चरमराती दिखाई दी। फील्ड स्टाफ को न तो ऐप और डेटा अपलोडिंग की पर्याप्त व्यावहारिक ट्रेनिंग मिली, न ही तकनीकी दिक्कतों के समाधान के लिए कोई प्रभावी हेल्पडेस्क उपलब्ध था। कई प्रगणकों ने नेटवर्क, सर्वर डाउन और ऐप हैंग होने जैसी समस्याओं की शिकायत की, जिससे डेटा अपलोड की रफ्तार बेहद धीमी रही।

जब हालात बिगड़ने लगे, तब प्रशासन हरकत में आया। ड्यूटी से इनकार करने वालों पर एफआईआर की चेतावनी, कई कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस, और मेडिकल छूट मांगने वालों के लिए मेडिकल बोर्ड जैसी कार्रवाई शुरू की गई। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या पूरी विफलता का ठीकरा सिर्फ निचले स्तर के कर्मचारियों पर फोड़ देना पर्याप्त है? उन अधिकारियों की जवाबदेही कौन तय करेगा, जिनकी निगरानी में यह पूरा सिस्टम शुरुआती दिनों में सुस्त पड़ा रहा?

प्रशासन ने अंतिम दौर में 100% डेटा अपलोड का दावा जरूर किया, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि हड़बड़ी में जुटाया गया डेटा आगे चलकर बड़ी समस्या बन सकता है। हाउस लिस्टिंग ही जनसंख्या गणना, सरकारी योजनाओं, बजट आवंटन और शहरी विकास की बुनियाद होती है। ऐसे में यदि शुरुआती डेटा ही संदिग्ध रहा, तो आने वाले वर्षों की नीतियां भी प्रभावित होंगी। यही वजह है कि जनगणना-2026 का यह पहला चरण अब गाजियाबाद प्रशासन की कार्यशैली और जवाबदेही दोनों पर बड़ा सवाल बनकर उभरा है।

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